भारत मे मल्टी लेवल मार्केटिंग का भविष्‍य क्या है, जाने कुछ ज़रूरी बातें


How does Multi Level Marketing Business Model Work?

भारत मे मल्टी लेवल मार्केटिंग लेवल यानि की MLM कोई नया कॉन्सेप्ट नही है जिसे हम आपको आज अवगत करवा रहे है, क्योकि इसका सीधा मतलब है की किसी भी इंसान को अपने लॉजिक से कोई प्लान जोइन करवाना और अपने और अपने साथ जुड़े हुए लोगो की इनकम करवाना. मतलब बिल्कुल साफ है इन सब प्लानो मे एक लीडर होता है जो अपने नीचे कुछ लोगो को जोड़ता है और उनके द्वारा किए गये इनवेस्टमेंट से कुछ इनकम कमाता है, फिर जब और लोग उन लोगो के नीचे जुड़ते है तो उपर की लाइन वाले सभी लोगो को उसका प्रॉफिट मिलता है. इस तरह एक चैन सिस्टम स्टार्ट होता है जिसमे हर एक इंसान अपने नीचे कुछ लोग जोड़ कर अपना इनवेस्ट किया हुआ पैसा वापस निकलना होता है |

Multi level marketing model. Photo by Pexels.com

आप मे से बहुत से लोग शायद इसके बारे मे बात नही करना चाहेंगे क्योकि लोगो के मान मे आम धारणा है कि इस तरह के मल्टी लेवेल मार्केटिंग प्लान या नेटवर्क मार्केटिंग प्लान मे कुछ ही लोग पैसा कमा पाते है और बाकी लोगो को नुकसान ही होता है. कुछ हद तक ये बात सही भी हो सकती है लेकिन इसके पीछे भी काई कारण हो सकते है जैसे कि:

  • किसी बहुत ज़्यादा पुराने प्लान मे जोइन करना जिसमे बहुत से लोग पहले ही जुड़ चुके हो – क्योंकि एसे प्लानो मे आपसे पहले बहुत लोग जुड़ चुके होते है और नये लोगो को जोड़ना बहुत मुश्किल होता है.
  • आपकी टीम मे निस्क्रिय मेंबर होना – अगर अपने अपनी टीम एसे लोगो से बनाई है जो केवल पैसे देकर जुड़ तो सकते है लेकिन आगे नये मेंबर नही जोड़ पाते है तो आपकी इनकम आना रुक जाएगी|
  • प्लान के बारे मे सही जानकारी नही होना – अक्सर लोग शुरू तो कर देते है लेकिन उन्हे इन प्लानो की पूरी जानकारी नही होती है इसी के चलते, पूरा लाभ नही मिल पाता है.

तो एसे ही कई और कारण भी है जिसकी वजह से लोग इन MLM प्लानो के मे पैसा कमा नही पाते है और अपनी मेहनत से कमाया हुआ धन गवा देते है.

MLM fraud gang busted in Hyderabad, Rs 200 Cr seized ...

लेकिन हम इसके भविष्‍य के बारे मे बात करेंगे. क्या भारत मे MLM प्लान का कोई भविष्य है या फिर एक समय के बाद ये सारी कंपनिया बंद हो जाएँगी. क्योकि अक्सर देखा जाता है की इस तरह की कंपनिया कुछ लोगो को प्रॉफिट करवा कर मार्केट से गायब हो जाती है, और रह जाते है कुछ छोटे और मासूम निवेशक जो एसे लोगो के बहकावे मे आकर अपने सुनहरे भविष्य के सपने देख लेते है और अपना कीमती समय और पैसा सब गवाकर ठगा सा महसूस करते है. बीते कुछ साल पहले इन कंपनियो का स्वर्णिम काल था जब इस तरह की कंपनिया कुकुरमुत्ते की तरह उग आई थी. इन कंपनिया मे लोगो ने बहुत से पैसे इनवेस्ट किए और बाद मे सिर्फ़ पछताने के अलावा कुछ भी नही मिला.
साल 2019 मे eBIZ नामक कंपनी ने लगभग 17 लाख लोगो से 5000 Cr. की ठगी की और बाद मे फरार हो गयी थी. पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए यहा क्लिक करे. MLM के बारे मे रिसर्च करने वाली फर्म strategy india dot com ने एसे सेंकडो SCAM की लिस्ट अपनी वेबसाइट पर डाल रखी है जिसे देखकर सहज ही इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है की ये किस तरह से लोगो को अपने जाल मे फसांती है और पैसे बना कर फुर्र हो जाती है. पूरी लिस्ट यहा पर देखे.
तो सरकार ने इन कम्पनियो से निपटने के लिए क्या किया
साल 2015 मे केंद्रीय सरकार ने इस तरह की कंपनियों पर नकेल कसने के लिए एक कमेटी का गठन किया जिसने इन कंपनियों पर कड़ी नज़र रखना शुरू किया और बहुत सी कंपनियों पर कार्यवाही शुरू कर दी है और उसके बाद ये दौर लगभग ख़तम या फिर बहुत कम हो गया है.

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गहलोत सरकार ने लिया मृत्युभोज बंद करने का बड़ा फैसला, पंच, सरपंच और पटवारी होंगे जिम्मेदार


कल एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राजस्थान की गहलोत सरकार ने राजस्थान में मृत्युभोज कुप्रथा को खत्म करने के लिए इस पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाने का फैसला लिया है| अगर कही भी मृत्यु भोज किया जाता है तो इसकी सुचना उस पंचायत के पंच, सरपंच और पटवारी सरकार को देंगे और अगर ऐसा नहीं किया गया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही का प्रावधान रखा गया है|

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मंडावा कनेक्ट राजस्थान सरकार की इस पहल का समर्थन करता है और बधाई देता है. ये एक ऐसा निर्णय है जिस से बहुत से गरीबों का जीवन नरक होने से बचेगा और वे कर्ज के बोझ तले नहीं दबेंगे. मृत्युभोज पर प्रतिबंध का कानून तो 1960 का है, लेकिन कई जगह इसका पालन नहीं हो रहा था. इसके अलावा पहली बार पंच-सरपंच और पटवारी की जवाबदेही तय की गई है. 

इससे शर्मनाक कुछ भी नहीं हो सकता: 
किसी घर में खुशी का मौका हो, तो समझ आता है कि मिठाई बनाकर, खिलाकर खुशी का इजहार करें, खुशी जाहिर करें. लेकिन किसी व्यक्ति के मरने पर मिठाईयाँ परोसी जायें, खाई जायें. इससे शर्मनाक कुछ भी नहीं हो सकता. 

क्या लग पाएगा कुरीती पर अंकुश? 
रिश्तेदारों को तो छोड़ो, पूरा गांव का गांव व आसपास का पूरा क्षेत्र टूट पड़ता है खाने को! तब यह हैसियत दिखाने का अवसर बन जाता है. लेकिन अब राज्य सरकार के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय ने इस कुरीती को रोकने के लिए अपनी कमर कसना शुरू कर दी है. ऐसे में देखने वाली बात तो यह होगी कि पुलिस इस कुरीती को रोकने में कितना कामयाब हो पाती है. 

सरकारी आदेश की प्रतिलिपि निचे दी गयी है.

सरकार के इस फैसले पर आपकी क्या राय है ? हमें कमेंट करके बताये .

कंगना और शिवसेना के बीच लडाई हुई तेज, कंगना का ऑफिस तोड़ा, क्या घर भी टूटेगा?


सुशांत सिंह राजपूत मामले मे कंगना और शिवसेना के बीच ट्विट्टर के जरिये शुरू हुयी जुबानी जंग अब अगले पड़ाव पर पहुँच गयी है। आज BMC ने जब अवैध निर्माण के तहत कार्यवाही करते हुए कंगना के ऑफिस को तोड़ा तो इसपर राजनीति तेज हो गयी। जहाँ BJP ने इसे बदले की भावना के तहत की कार्यवाही बताया तो वही NCP के शरद पवार ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे गैरजरूरी बता दिया।

आज जब BMC कंगना के ऑफिस को तोड़ रही थी तो कंगना की तरफ से इस कार्यवाही को ‘बाबर’ और अपने ऑफिस को ‘ राम मंदिर ‘ बताते हुए इसे धार्मिक रंग भी देने की कोशिश की गयी।

कंगना का ट्वीट

उधर जैसा की अनुमान था, करणी सेना ने भी अपने कथन के अनुसार कंगना को एस्कॉर्ट करने के लिये 100 गाड़ियों का जखीरा भेज कर महाराष्ट्र में अपनी मौजूदगी का सख्त संदेश देने की कोशिश की। बाद मे करणी सेना के कार्यकर्ता मुंबई एयरपोर्ट पर पहुंच गए जहाँ पर उन्होंने उद्दव सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कंगना के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया।

मुंबई पहुँचने के बाद कंगना ने एक विडिओ जारी कर सीधा उद्दव ठाकरे पर निशाना साधते हुए एक वीडियो जारी किया और ललकारने के अंदाज में कहा की “तुमने आज मेरा घर तोडा है कल तेरा गुरुर टूटेगा वक्त सबका आता है”
आज हुयी इस कार्यवाही में एक बात तो साफ हो गयी की मुंबई में रहकर आप सरकार के साथ पन्गा लेने की कोशिश करोगे तो अपने सत्ताबल के दम पर वहां की सरकार आपको किसी भी हद तक परेशान कर सकती है क्योकि देखने वाली बात ये है कि जो ऑफिस आ तोडा गया है वो आज से १८ महीने पहले बनकर तैयार हो गया था और चल रहा था। इस कार्यवाही को इसलिए भी गलत बताया जा रहा है क्योकि मुंबई में इस तरह के तथाकथित बहुत से अवैध निर्माण मौजूद है और BMC ने खास तौर पर इसे निशाना बना कर कार्यवाही की है।

सौ बात की एक बात
इस पुरे प्रकरण में देखने वाली बात ये है कि जिस सुशांत सिंह राजपूत मामले से शुरू हुआ ये विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुँचता दिखाई पड़ रहा है। ये सरकार की तरफ से उन सब बातो पर पर्दा डालने का भी प्रयास हो सकता है जिसमे बहुत बड़े दिग्गजों के नाम सामने आने वाले थे। दूसरा सुशांत को न्याय दिलाने की ये लड़ाई अब कितनी लंबी चलेगी ये भी देखना दिलचस्प होगा।
इन सब बातो से भी बढ़ कर परेशान करने वाली बात ये है कि अगर किसी घर में उसका मालिक मौजूद न हो तो क्या एक नोटिस चिपका कर उस घर को धराशायी किया जा सकता है ? घर से याद आया कि अब कंगना के घर के कुछ हिस्से को अवैध निर्माण का हवाला देकर तोड़ने कि कार्यवाही कि बात भी सामने आ रही है जिस से ये साबित हो रहा है कि ये सचमुच एक बदले कि भावना के तहत कि गयी कार्यवाही है। कम से कम इन हालातो में ये बात और सही साबित होती दिख रही है।

Story: Surendra Singh Tetara
Image and Video: Twitter

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फिर से शुरू हुयी पंचायत चुनावो की सुगबुगाहट, प्रारम्भिक तैयारियां पूरी करने का आदेश जारी


राजस्थान चुनाव आयोग ने माह जनवरी और मार्च २०२० में ७४६३ पंचायत समितियों में सरपंच और पंच के चुनाव सम्पादित करवाए थे और बाद में कोरोना महामारी के कारण चुनाव स्थगित कर दिए थे। अब जब कोरोना का प्रभाव कुछ काम हो रहा है तो फिर से बची हुयी पंचायत समितियों में चुनाव करवाने की तैयारियों के मद्देनजर विस्तृत गाइडलाइन जारी की गयी है। इस गाइड लाइन में चुनाव के विभिन्न चरणों के दौरान अपनायी जाने वाली प्रिक्रिया की नियमावली बनाकर उसके तहत बचे हुए चुनाव सम्पन करवाने का आह्वान किया गया है। हालाँकि अभी चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की गयी है किन्तु इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि चुनाव आयोग विभिन्न जिलों से तैयारियों कि समीक्षा के पश्चात्त तिथियों का एलान करेगा।

Rajasthan: State electoral chief Ashwini Bhagat to hold meetings with  collectors
Photo Credit: DNA

अभी हाल ही में जारी किये गए एक प्रपत्र के अनुसार ३८५० पंचायतो के चुनाव करवाने बाकि है जिसके बारे में चुनाव आयोग तेजी से काम कर रहा है। विस्तृत पत्र के लिए यहाँ क्लिक करे।

MP Panchayat Chunav 2020 | मध्य प्रदेश पंचायत/सरपंच चुनाव पात्रता,योग्यता  पूरी जानकारी

कोरोना के चलते इस बार निर्वाचन आयोग अतिरिक्त सतर्कता बरतने के उपाय कर रहा है जिस से आम जान को इस महामारी से बचाया जा सके। इसके लिए भी एक विस्तृत गाइड लाइन तैयार की गयी है और समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों को इसकी अनुपालना सुनिश्चित करने को कहा गया है। इस गाइड लाइन हेतु यहाँ क्लिक करे।

सौ बात कि एक बात
अब जब एक बार फिर से चुनाव कि सुगबुगाहट शुरू हो गयी है तो जाहिर है कि भावी सरपंचो और पंचो के मन में लड्डू फूटने शुरू हो जायेंगे। और उनके चेले चपाटो के भी घुघरे बंध जायेंगे, ऐसे में गांव की जनता को फिर से जागरूक होके इस बात का निर्णय करना होगा कि जिसे वो अपना वोट देने का मानस बना रहा है क्या वो पुरे पांच साल में गांव का विकास करने के लायक भी है या नहीं!

एक खास बात, अगर कोई कैंडिडेट आपको शराब या पैसे के बदले वोट मांगता है तो सतर्क हो जाइएगा, क्योंकि वो अगर सरपंच बन गया तो सबसे पहले अपने शराब के पैसे वसूल करेगा ना कि गांव का विकास करेगा।

अगर आपको ये स्टोरी पसंद आयी तो इसे लाइक, शेयर करना ना भूलियेगा। अगर आपको कोई सुझाव देना है तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखियेगा।

Story: Surendra Singh Tetara
Photo Credit: Google

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JEE – NEET क्या सही है इस मुद्दे का राजनीतिकरण?


इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले (Entrance Exam) के लिए होने वाली NEET और JEE की परीक्षा को लेकर लगातार विरोध हो रहा है। कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के बीच ये परीक्षा कराई जाए या न कराई जाए, इस पर बहस छिड़ी हुई है। लेकिन अब इस विवाद में राजनीति भी तेज हो गई है। एक तरफ जहां विपक्ष को बैठे बिठाये सरकार के विरोध का मुद्दा मिल गया वही इस परीक्षा में बैठने वाले छात्रों में असमंजस की स्थिति बन गयी है। एक अनुमान के अनुसार लगभग ९० प्रतिशत से भी ज्यादा छात्रों ने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड भी कर लिया है।

Postpone NEET UG, JEE Main Exams: Students Urge PM Narendra Modi

इस बात में कोई शक नहीं है की इस परीक्षा करवाने पर छात्रों में कोरोना का संक्रमण फैलने का खतरा बनेगा लेकिन इस बात के दूसरे पहलु पर भी गौर किया जाना अति आवश्यक है, इस परीक्षा के न होने से सभी प्रकार के मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन नहीं हो पायेगा और जिन छात्रों ने पुरे साल इसकी तैयारी की है उनका पूरा साल ख़राब हो जायेगा। इसके साथ साथ ये भी बात गौर करने लायक है की अगर इस परीक्षा को देर से करवाया गया तो छात्रों को अपनी पढाई के लिए पूरा समय नहीं मिलेगा और वे परीक्षा में ठीक से पूरी नहीं कर पाएंगे।

इसी बीच दिल्ली विश्वविद्यालय, इग्नू, लखनऊ विश्वविद्यालय, जेएनयू, बीएचयू, आईआईटी दिल्ली और लंदन विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ यरुशलम और इजराइल के बेन गुरियन विश्वविद्यालय के भारतीय १५० से भी ज्यादा प्रोफेसर्स ने प्रधान मंत्री को पत्र लिख कर इस परीक्षा करवाने की मांग की है। इन विदवेत्ताओं ने कहा है कि भारत में कुछ लोग राजनितिक फायदे के लिए छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने कि कोशिश कर रहे है जो कि बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। इन प्रोफेस्सोर्स ने सरकार पर भरोसा जताते हुए लिखा है कि “हम मानते हैं कि केंद्र सरकार पूरी सावधानी बरतते हुए जेईई और नीट परीक्षाएं आयोजित कर लेगी, ताकि छात्रों के भविष्य का ध्यान रखा जा सके और 2020-21 के लिए अकादमिक कैलेंडर तैयार किया जा सके। “

सौ बात की एक बात
राजनितिक एजेंडा चलाने वाले दलों की बात तो समझ में आती है कि उनके पास वर्तमान में कोई मुद्दा नहीं है लेकिन सोचने वाली बात ये है कि एक तरफ तो सरकार बाजार खोलने, मेट्रो चलाने और ये जताने कि कोशिश करने में लगे हुए है कि कोरोना पर काबू पाया जा रहा है (दिल्ली का उदहारण ले ले), वही इस बात पर जोर दे रहे है कि छात्रों को कोरोना हो जायेगा। यह ये गौर करने वाली बात है कि जो छात्र NEET JEE का एग्जाम देंगे वे इतने तो जरूर समझदार होंगे कि अपना ध्यान इस महामारी से रख सके।
दूसरी बात ये है कि क्या आप सब लोग उन सब लोगो को भूल चुके है जो कोरोना के इस भयंकर काल में भी दिन रात सड़क पर, अस्पताल में, और दूसरी जगहों पर ड्यूटी कर रहे है ? क्या उन लोगो को कोरोना का डर नहीं है? क्या आप लोगो को उन लोगो कि संख्या पता है कि कितनी संख्या में है जो मात्र २८ लाख छात्रों के लिए इतना हो हल्ला मचा रहे हो ? क्या सरकार को ये बात पता नहीं कि इन सब छात्रों को कैसे सुरक्षित रखते हुए परीक्षा का आयोजन करवाया जाये ?
उम्मीद है सरकार और छात्र इस बात को समझते हुए फैसला लेगी और जहां तक सुप्रीम कोर्ट का सवाल है वो तो इन सब बातो को बहुत ही बारीकी से देख ही रहा है।

Story: Surendra Singh
Photo source: Google

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झुंझुनू में सक्रिय हुयी श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना, क्या कर पायेगी चूरू जैसा धमाकेदार प्रदर्शन ?


श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना जो कि एक सामाजिक संगठन है ने पिछले कुछ समय में अपने कार्यो से राजस्थान में एक अलग पहचान बनायीं है, संगठन का कार्य समाज में होने वाली समसामयिक घटनाओ में किसी भी जाति या धर्म के व्यक्ति के साथ हुए अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाना और न्याय दिलाने में महत्ती भूमिका निभाना रहा है। संगठन के मुखिया श्री सुखदेव सिंह गोगामेड़ी आज सम्पूर्ण भारत में समाज के दबे कुचले, शोषित, वंचित और पीड़ित लोगो के हक़ में आवाज उठाने के लिए जाने जाते है। इसके अलावा सुखदेव सिंह वर्तमान में युवाओ में राष्ट्रीयता और देशप्रेम की ज्वाला प्रज्वलित करने का चर्चित चेहरा बन गए है। वर्तमान में युवाओ को साथ जोड़ने और नेतृत्व में उनका साथ श्री राज सिंह शेखावत जो की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है, देते है। इसके अलावा श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना में युवा साथियो की एक कुशल और मजबूत टीम है जो धरातल पर हर सामाजिक मुद्दे पर अपना योगदान देने हेतु सदैव तत्पर रहती है।

karni sena will announce their own national party soon: Sukhdev ...
Sukhdev Singh Gogamedi

श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना राष्ट्रीय स्तर चर्चित मुद्दों पर सदैव अपना पक्ष रखा है और पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने में आगे रहे है इसमें चाहे पद्मावत फिल्म में राजपूती इतिहास के साथ छेड़छाड़ का मामला, सांवराद में आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर का मामला, स्वर्ण आरक्षण मामले में विधान सभा के घेराव, २०१८ में लाल चौक श्री नगर में तिरंगा लहराने का मामला, और वर्तमान में सुशांत सिंह आत्महत्या मामले में सी बी आई जाँच की मांग का मामला हो। इन सभी सामाजिक मुद्दों में करणी सेना ने अपनी सक्रियता से सभी राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों की नींद उड़ने का काम किया है और सम्बंधित जिम्मेदार लोगो को अपनी जिम्मेदारी का एहसास करवाया है।

Karni Sena - Shree Rashtriya Rajput Karnisena – Apps on Google Play

श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है किन्तु राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के परिदृश्य में देखा जाये तो संगठन ज्यादा उभर कर कर दिखाई देता है, खासकर राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र जहा संगठन हर क्षेत्रीय मुद्दे पर समाज में अग्रणी भूमिका निभाता है। शेखावाटी भूभाग के चूरू जिले में संगठन की सक्रियता पिछले एक साल से निरंतर बढ़ी है जब से श्री संदीप सिंह चैनपुरा बड़ा ने कमान संभाली है। आज चूरू जिले के लगभग हर ब्लॉक पर श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभा रही है। संदीप सिंह इस से पहले गुजरात में भी करणी सेना में भी संगठन के सक्रिय सदस्य रहे है। वही दूसरी और सैनिक जिले के रूप में सम्पूर्ण देश में पहचान बनाने वाले झुंझुनू जिले में इस संगठन का कर सिमित रूप से चल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री मनोहर सिंह घोड़ीवारा इस संगठन का झुंझुनू से नेतृत्व कर रहे है और वर्तमान में कार्यकारणी विस्तार पर कर चल रहा है।

Sandeep Singh Chainpura Bada

सौ बात की एक बात
सौ बात की एक बात ये है कि जिस तरह से संगठन का कार्य चूरू में संदीप सिंह के नेतृत्व में चल रहा है क्या श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की झुंझुनू इकाई कर पायेगी?
वर्तमान में संगठन को जिले में मनोहर सिंह घोड़ीवारा के ऊर्जावान और जुझारू नेतृत्व के साथ युवा समर्थन और सहयोग की सख्त जरुरत है जो पंचायत स्तर पर अपने कार्यकर्ता तैयार कर सके और नयी कार्यकारणी का गठन करते समय शायद शीर्ष नेतृत्व इस बात को अवश्य ध्यान में रखेगा।

Story: Surendra Singh Tetara
Photo Credit: Facebook

गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ


वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

श्री गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर समस्त देश एवं प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।