क्या मायने रखता है विकास दुबे का उज्जैन में पकड़ा जाना?


आज एक नाटकीय घटनाक्रम में कानपुर पुलिस हत्याकांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में आत्मसमपर्ण कर दिया. बताया जा रहा है कि वह उज्जैन में महाकाल मंदिर में सुबह 9 बजे पंहुचा और वीआईपी दर्शन की पर्ची कटवाई. उसके कुछ देर बाद वह जोर से चिल्लाया कि में विकास दुबे हूँ, कानपूर वाला.
बताया जा रहा है की उसने ही स्थानीय मीडिया और पुलिस को सुचना दी थी और फिर उनके सामने सरेंडर कर दिया. बेशर्मी की हद तो तब हुई जब मीडिया वालो को देखकर वो जोर जोर से चिल्लाने लगा कि “में ही विकास दुबे हु, कानपूर वाला”. तभी एक पुलिशकर्मी ने उसे एक जोरदार थप्पड़ लगा दिया.

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कैसे पहुंचा उज्जैन?
कानपुर हत्याकांड के पश्चात विकास दुबे तुरंत वहां से फरार हो गया था. उसके बाद उसे गुरुग्राम और फरीदाबाद में देखा गया जहां वो एक होटल के CCTV कैमरे में नजर आया था. इन सात दिनों में जहां वो पुलिस से बचता हुआ फिर रहा था, वही पुलिस उसके गुर्गों को निपटाने में लगी थी. अलग अलग जगह हुयी छापेमारी और मुठभेड़ों में उसके गुर्गे मारे गए

कौन कौन मारा गया?
विकास दुबे के मारे गए साथियों में उसका मामा प्रेम प्रकाश पांडेय और अतुल दुबे है जो पुलिस एनकाउंटर के कुछ देर बाद ही बिकरू गांव के जंगलों में पुलिस ने ढेर कर दिए थे. विकास दुबे का खास गुर्गा अमर दुबे बुधवार को हमीरपुर में एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. वही उसके खास प्रभात मिश्रा को पुलिस जब फरीदाबाद से गिरफ्तार कर रिमांड पर कानपुर ले जा रही थी तभी उसने पुलिस की पिस्तौल छीन कर फरार होने की कोशिश की, पुलिस ने मुठभेड़ में उसे भी मार गिराया. विकास दुबे का एक और करीबी प्रवीण भी इटावा में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया.

उठने लगे है कई सवाल?
सबसे बड़ा सवाल ये है की विकास दुबे उत्तर प्रदेश से मध्य प्रदेश कैसे पंहुचा? बताया जा रहा है की वो कानपूर से फरीदाबाद और फिर वहां से एक गाड़ी में उज्जैन पहुँच गया जो कि पूरी तरह से सुरक्षित थी. अब जल्द ही उसे कोर्ट में पेश किया जायेगा फिर उसे उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंपने की प्रकिया शुरू की जाएगी. बताया ये भी जा रहा है कि लगातार उसके गुर्गों के एनकाउंटर से वह घबरा उठा होगा और सरेंडर का प्लान बनाया होगा.