सरपंच चुनाव, गांव का पंचवर्षीय त्यौहार।


जय जय।
आज बात करेंगे उन लोगो के बारे में जिनके लिए चुनाव होता है एक उत्सव।

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चुनाव आज- Inext Live

निर्वाचन आयोग ने जैसे ही पंचायत चुनावो की घोषणा की, गांव में कुछ लोगो के पावों में घुंघरू जैसे बांध गये, मन में झुरझुरी जैसे पैदा होने लगी क्योकि ये एक ऐसा अवसर है जिसकी प्रतीक्षा वे पिछले पांच साल से कर रहे थे। अब आप बोलेंगे ऐसा क्यों ? अरे भाई, सीधी सी बात है कि जिन लोगो को चुनाव् लड़ना है वो तो अपनी तैयारी पिछले पांच साल से कर ही रहे थे। हर सामाजिक उत्सव में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना, हर खेल प्रतियोगिता के दौरान दिखाई देना, गांव के हर मेले में कुछ एक्टिविटी करना जैसे कि पानी कि प्याऊ लगाना, व्यवस्था देखने कि कोशिश करना इत्यादि। सबसे बड़ी बात ये है कि आप ऐसे लोगो को किसी बड़े बुजुर्ग की गमी के दौरान उस घर में लगातार देख पाएंगे। आखिर क्यू? अरे भाई वोट ! इन सब कार्यक्रमो में शामिल होती है भीड़। गांव के लगभग मोजिज लोग इक्कट्ठा होते है वह आपका वोट पक्का करने का, अपनी छवि चमकाने का सबसे बड़ा मौका जो होता है।

34 Lnp Gram Panchayat Sarpanch Election Result 2020

बात भटक रही है शायद, सो वापस उन लोगो पर आते है जो जिन्हे चुनाव का हर क्षण उत्सव लगता है। ऐसे लोग बड़ी आसानी से पहचाने जा सकते है। ये लोग आपके आसपास ही होते है। आपके काकोसा, बाबोसा या दादोसा या कुछ मामलो में आपके बड़े भाई साहब भी हो सकते है। जिनके तथाकथित सम्बन्ध गांव के सरपंच, प्रधान, पटवारी या स्थानीय नेता जी से होते है और वे इस बात को हर मोके पर भुनाने की कोशिश करते है। अब जैसे ही इन लोगो को पता लगता है की चुनाव की तारीख पड़ चुकी है वैसे ही ये लोग एकदम से सक्रिय हो जाते है। सबसे पहले तो इस बात का पता लगाया जाता है की वर्तमान मे किस नेता की पहुँच कितनी है फिर जब इस बात का पता लगता है तो बड़ी ही बारीकी से अपनी गोटियां सेट की जाती है । फिर ये लोग गाँव भर मे इस बात का प्रचार करने मे जुटते है की फलां सरपंच उम्मीदवार मेरे अपने निजी जानकार है और मेरा उनके साथ दिन रात का उठना बैठना है।

अगला दांव उम्मीदवार को रिझाने का होता है, कि भाई साहब, उस मोहल्ले मे कुल 150 वोट है जिसमे से 125 वोट अपने संपर्क मे है और जहाँ हम बोलेंगे वही वोट जायेगा। बस थोड़ा सा खर्चा पानी करना पड़ेगा। और इस तरह से आपके वोट की कीमत तय कर दी जाती है । मजे की बात ये है कि आपको इस सौदेबाजी का भान भी नही होता है । फिर बारी आती है आपको पटाने की, बहुत प्यार से और सावधानी से उम्मीदवार और आपके बीच मे कोई कनेक्शन ढूंडा जाता है और एक शाम जब आप अपने काम के फुर्सत पाकर आराम से बैठे होते है तो घर के बाहर आवाज दी जाती है… अरे भाया घर पर है क्या?… हाँ बोलते है घर मे एंट्री की जाती है और फिर शुरू होती है इधर उधर की बात, लगभग 15 मिनट बाद मुद्दे को बीच मे फेंका जाता है, वो भी उस समय जब आप बाकि बातों मे लगभग सहमति जता चुके होते हो ।…… तो इस बार बोट किन् देवोगा…. आप बोलते है, अभी कोई आया ही नही है बात करने तो किसको दे,…. बस वो ही मौका होता है जब आप इनके चंगुल में फंस चुके होते हो,……. अरे भाई जी हम आये है ना…… भाई साहब ने भेजा है और आपको बोला है कि वैसे तो उसको बोलने की जरूरत ना है क्युंकि वो तो अपने खास आदमी है पण एक बार मेरा संदेश देकर आवो कि वोट आपां न ही देणा हैं…. ऐ ल्यो पीला चावळ…. ठीक है.. अब म्हे चाला हाँ..

अब आप चाह कर भी कुछ नही कर सकते, आप एक अराजनीतिक व्यक्ति हो जिसे इस झमेले मे नही पड़ना है सो….. आप अपना वोट भले ही किसी भी कंडीडेट को डाले पर आप पर ठप्पा तो लग गया।

सो बात की एक बात

भले ही बात कड़वी लगे पर लगभग सभी सरपंच आज के दिन बिना किसी एजेंडा के चुनाव लड़ते है, क्यों? क्योंकि उनको पता है कि जहाँ के लोग एक बोतल दारू मे या 500 रुपिया मे बिकते हो वहाँ क्या एजेंडा बनाना और बताना। और दूसरी बात मानलो अगर आप ने एजेंडा पूछ भी लिया तो आप किसी दूसरी दुनिया से आये हुए जीव समझे जायेंगे क्युंकि आपको फिर समाज और गांव की समझ नहीं है ऐसा बोलकर साइड कर दिया जायेगा ।

दूसरी बात ये भी है कि लगभग 80% मतदाता तो वो ही करते है जो समाज या भाई बंधु कर रहे है, यानि वोट वहीं डाला जायेगा जहाँ समाज बोलेगा । बाकि बचे 20% में आधे उधर जायेंगे और आधे इधर ।

तो क्या करे… लड़ मरे क्या… समाज से या फिर सरपंच प्रत्याशी से….??

ना… लड़ना क्यु… सीधा हमला तब करे जब मीटिंग हो रही हो समर्थन देने वाली… चंद सीधे सवाल… क्या करोगे अगर जीत गए तो…. इन मुख्य समस्याओं का…. जो जुड़ी है सीधी हर जनमानस से जो बैठा है इस मीटिंग में….. पानी…बिजली….पेंशन…. सड़क… रोज़गार… खेल… शिक्षा… गाँव… गुवाड….

अगर एक भी समस्या का समाधान है… या उसके समाधान का तरीका मालूम है…. तो वो आपका… आपके गाँव का पक्का हितैषी साबित होगा…. और अगर आपको कंधे पर हाथ रख कर कोने में ले जाया जाने लगे तो सतर्क हो जाये… क्युंकि सरपंच साहब कि अगली स्कॉर्पियो आपके पैसे से खरीदी जानी तय हो गयी है ।

स्टोरी: सुरेंद्र सिंह तेतरा, फ़ोटो: गूगल बाबा

फिर से शुरू हुयी पंचायत चुनावो की सुगबुगाहट, प्रारम्भिक तैयारियां पूरी करने का आदेश जारी


राजस्थान चुनाव आयोग ने माह जनवरी और मार्च २०२० में ७४६३ पंचायत समितियों में सरपंच और पंच के चुनाव सम्पादित करवाए थे और बाद में कोरोना महामारी के कारण चुनाव स्थगित कर दिए थे। अब जब कोरोना का प्रभाव कुछ काम हो रहा है तो फिर से बची हुयी पंचायत समितियों में चुनाव करवाने की तैयारियों के मद्देनजर विस्तृत गाइडलाइन जारी की गयी है। इस गाइड लाइन में चुनाव के विभिन्न चरणों के दौरान अपनायी जाने वाली प्रिक्रिया की नियमावली बनाकर उसके तहत बचे हुए चुनाव सम्पन करवाने का आह्वान किया गया है। हालाँकि अभी चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की गयी है किन्तु इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि चुनाव आयोग विभिन्न जिलों से तैयारियों कि समीक्षा के पश्चात्त तिथियों का एलान करेगा।

Rajasthan: State electoral chief Ashwini Bhagat to hold meetings with  collectors
Photo Credit: DNA

अभी हाल ही में जारी किये गए एक प्रपत्र के अनुसार ३८५० पंचायतो के चुनाव करवाने बाकि है जिसके बारे में चुनाव आयोग तेजी से काम कर रहा है। विस्तृत पत्र के लिए यहाँ क्लिक करे।

MP Panchayat Chunav 2020 | मध्य प्रदेश पंचायत/सरपंच चुनाव पात्रता,योग्यता  पूरी जानकारी

कोरोना के चलते इस बार निर्वाचन आयोग अतिरिक्त सतर्कता बरतने के उपाय कर रहा है जिस से आम जान को इस महामारी से बचाया जा सके। इसके लिए भी एक विस्तृत गाइड लाइन तैयार की गयी है और समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों को इसकी अनुपालना सुनिश्चित करने को कहा गया है। इस गाइड लाइन हेतु यहाँ क्लिक करे।

सौ बात कि एक बात
अब जब एक बार फिर से चुनाव कि सुगबुगाहट शुरू हो गयी है तो जाहिर है कि भावी सरपंचो और पंचो के मन में लड्डू फूटने शुरू हो जायेंगे। और उनके चेले चपाटो के भी घुघरे बंध जायेंगे, ऐसे में गांव की जनता को फिर से जागरूक होके इस बात का निर्णय करना होगा कि जिसे वो अपना वोट देने का मानस बना रहा है क्या वो पुरे पांच साल में गांव का विकास करने के लायक भी है या नहीं!

एक खास बात, अगर कोई कैंडिडेट आपको शराब या पैसे के बदले वोट मांगता है तो सतर्क हो जाइएगा, क्योंकि वो अगर सरपंच बन गया तो सबसे पहले अपने शराब के पैसे वसूल करेगा ना कि गांव का विकास करेगा।

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Story: Surendra Singh Tetara
Photo Credit: Google

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